३ गर्दन के दोनों तरफ के हिस्से भी लसिका प्रणाली बेहतर संचालन में काफी मददगार हैं और वुजू में इन हिस्सों को धोना भी शामिल है।
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२ लसिका प्रणाली को मजबूती देने में नाक के अंदर की कोमल हड्डी तक का हिस्सा और टोंसिल सबसे महत्वपूर्ण है और इन हिस्सों को वुजू के दौरान धोना शामिल है।
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[11] उल्लेखनीय इतर फुफ्फुसीय संक्रमण भागों में अन्य हिस्सों के साथ, फेफड़ों का आवरण (तपेदिक के परिफुफ्फुसशोथ में), केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (तपेदिक मैनिंजाइटिस में), लसिका प्रणाली (गर्दन की गंडमाला में), जनन मूत्रीय प्रणाली (मूत्रजननांगी तपेदिक में), और हड्डियों व जोड़ों (रीढ़ की हड्डी के पॉट्स रोग में), शामिल हैं।
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आखिर वुजू में ही ये फायदे क्यों छिपे हैं, इसकी मुख्य वजह हैं-१ लसिका प्रणाली के बेहतर संचालन या कहें मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए यह जरूरी है कि बदन का कोई भी हिस्सा पानी से अछूता नहीं रहना चाहिए और ऐसा वूजू या गुस्ल से ही संभव है।
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[11] उल्लेखनीय इतर फुफ्फुसीय संक्रमण भागों में अन्य हिस्सों के साथ, फेफड़ों का आवरण (तपेदिक के परिफुफ्फुसशोथ में), केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (तपेदिक मैनिंजाइटिस में), लसिका प्रणाली (गर्दन की गंडमाला में), जनन मूत्रीय प्रणाली (मूत्रजननांगी तपेदिक में), और हड्डियों व जोड़ों (रीढ़ की हड्डी के पॉट्स रोग में), शामिल हैं।